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नवरात्रि का पांचवा दिन मांँ स्कंदमाता पूजा विधि

नवरात्रि का पांचवा दिन मांँ स्कंदमाता पूजा विधि

दोस्तों नवरात्रि के पांचवे दिन में मां दुर्गा के पंचम रूप की पूजा की जाती है।

माता स्कंदमाता को मां दुर्गा के पंचम रूप के रूप में जाना जाता है।

कहां जाता है कि यदि कोई नि: संतान माता पिता, संतान की आस में माता स्कंदमाता की पूजा करते हैं।

तो उन्हें जल्द ही संतान की प्राप्ति होती है। 

इसके अतिरिक्त हिंदू धर्म में कहा जाता है कि माता स्कंदमाता अपने भक्तों से बहुत जल्द ही

प्रसन्न हो जाती हैं। माता सदैव अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। 

दोस्तों आज हम अपने ब्लॉग में माता स्कंदमाता के विषय में चर्चा करेंगे। साथ ही माता की

पूजा विधि के विषय में भी आपको जानकारी देंगे। इसलिए हमारे ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़िए।

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स्कंदमाता कौन है?

माता पार्वती एवं शिव जी के पुत्र कार्तिकेय को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है।

इसलिए माता पार्वती को स्कंदमाता भी कहा जाता है।

माता स्कंदमाता के संबंध में कहा जाता है कि जिस तरह एक मां अपने बच्चे को हर दुविधा से बचाती हैं। 

ठीक उसी प्रकार माता स्कंदमाता भी अपने भक्तों को हर प्रकार के दुविधा से बचाती हैं।

भगवान कार्तिकेय अपनी माता के कारण ही तारकासुर नामक राक्षस से मुक्ति पाएं थे।

इसलिए माता स्कंदमाता की पूजा संतान प्राप्ति के लिए भी किया जाता है।

माता स्कंदमाता का स्वरूप कुछ इस प्रकार का होता है- मां स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं,

वह सिंह की सवारी करती हैं और कमल पर विराजमान रहती हैं। 

वह अपने दो हाथों में कमल भी रखती है, तीसरे हाथ से भगवान कार्तिकेय को धारण करती है

और अपने सभी भक्तों को चौथे हाथ से आशीर्वाद देती है।

नवरात्री के पाँचवे दिन स्कंदमाता पूजन विधि

माता स्कंदमाता की पूजा को आरंभ करने से पहले आपको सबसे पहले उन्हें नमन करना होगा।

माता को तिलक आदि कर। उनके सामने दीप जलाते हुए। उन्हें नैविद्य अवश्य दे।

फिर माता के समक्ष कुमकुम, अक्षत, फल फूल इत्यादि को रखें।

स्कंदमाता को लाल रंग का चुन्नी अवश्य चढ़ाएं क्योंकि मां स्कंदमाता को लाल रंग अच्छा लगता है।

माता को चंदन लगाकर,उनके सामने एक घी का प्रदीप अवश्य जलाएं।

मा स्कंदमाता का स्तुति मंत्र

“या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेणा संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”

माता को केला बहुत ही प्रिय है। इसलिए माता के भोग में आप केला अवश्य ही चढ़ाएं। 

स्कंदमाता के भोग में चढ़ाया हुआ केला, अवश्य ही ब्राह्मणों को दान कीजिए। 

माताको पूजा में इलायची अवश्य चढ़ाइएगा। यह शुभ माना जाता है।

मा स्कंदमाता को सुख एवं शांति की देवी भी कहा जाता है। देवी स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए,

भक्त उन्हें फल, विशेष रूप से केले अवश्य चढ़ाते हैं। 

नवरात्रि के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता के समक्ष खचद को समर्पण करने के लिए

ज्यादातर भक्त पीले रंग के कपड़े पहनते हैं।

नवरात्री के पाँचवे दिन क्या करें क्या ना करें

पीले रंग अपने आप में ही शुभ होता है और भक्तगण जब पीले रंग को धारण कर माता की पूजा करते हैं।

तो माता उनसे बेहद प्रसन्न हो जाती हैं। पीला रंग आनंद और आशावाद का भी रंग होता है।

दोस्तों आज हमने जाना नवरात्रि के पांचवें दिन के विषय में, जिस दिन को पूर्ण रूप से माता स्कंदमाता

को समर्पित किया जाता है। माता स्कंदमाता कार्तिकेय भगवान के माता के रूप में भी जानी जाती है।

माता पार्वती का नाम ही स्कंदमाता है। यदि आप भी माता स्कंदमाता का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।

तो नवरात्रि के दिन अवश्य ही माता स्कंदमाता की पूजा कीजिए। यदि आप संतान चाहते हैं तो

माता स्कंदमाता की पूजा आपको अवश्य ही करनी चाहिए।

नवरात्रि का पांचवा दिन मांँ स्कंदमाता पूजा विधि

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