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घरेलू हिंसा की कहानी

घरेलू हिंसा की कहानी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना किसी को भी झकझोर कर रख सकती है। इस प्रताड़ना के शरीर से घाव तो भर जाते हैं लेकिन दिल के जख्म हमेशा ताजा रहते हैं।

ऐसे ही जख्मों की कहानी आज मैं आप को सुनाने जा रही हूं। मेरी शादी को अभी 10 दिन ही हुए थे लेकिन यह 10 दिन भी किसी जेल से कम नहीं रहे।

पता नहीं क्यों पर मेरे ससुराल के सभी सदस्य, पहले ही दिन से मेरे साथ अजीब सा व्यवहार कर रहे थे।यहां तक कि रात को भी मुझे चैन की नींद सोने का हुकुम नहीं था।

जब चाहे मेरी सास अपनी टांगे दबाने के लिए मुझे उठा लेती थी। नई नवेली दुल्हन की तरह मैं भी उनकी हर बात चुपचाप मान लेती लेकिन जिस काम को मैं अपनी जिम्मेदारी समझकर कर रही थी।

वही काम मुझे धीरे-धीरे अब गुलामी की तरह लगने लगा था। एक दिन सुबह 4:00 बजे मेरे कानों में, कुछ आवाज सुनाई पड़ी, पहले तो मुझे लगा कि यह मेरा वहम है।

फिर मैंने दरवाजा खोलकर बाहर देखने की हिम्मत की तो मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। क्योंकि यह आवाज कहीं और से नहीं, हमारी रसोई घर से आ रही थी।

मैंने देखा कि मेरी सास ने सुबह ही नाश्ता बनाने की तैयारियां शुरू कर दी थी। मुझे यह देख कर बहुत खुशी हुई कि इतने दिनों बाद आज मुझे आराम करने का मौका मिलेगा।

घरेलू हिंसा की कहानी

मैंने अपनी सासू मां से कहा, “मां जी, आपने इतनी तकलीफ क्यों की मैं अभी उठने ही वाली थी”। परंतु मेरी सास ने मुझे जवाब दिया ” नहीं बहु, तुम आराम करो, बहुत दिन हो गए तुम्हें काम करते हुए”। उनकी इतनी प्यारी बात सुनकर मैं फिर से नींद लेने के लिए चली गई।

मुझे पता ही नहीं चला, कब सुबह के 7:00 बज गए और मैं अब तक अपने बेडरूम में सो रही थी। जैसे ही मैं अपने कमरे से बाहर निकली, पतिदेव मुझे बहुत गुस्से भरी नजरों से देख रहे थे।

मैं समझ नहीं पाई कि आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया जो उनकी आंखों में मेरे लिए इतना गुस्सा है। मेरे पति ने मुझे इशारे से वापस कमरे में बुलाया और मुझे एक जोरदार थप्पड़ मारा। उन्होंने इतनी जोर से मुझ पर हाथ उठाया कि मैं सीधे दीवार से जा टकराई।

एक क्षण के लिए तो मेरा सिर चकरा गया पर मैंने खुद को संभालते हुए जैसे ही अपने चेहरे पर हाथ लगाया। तो मेरा चेहरा बुरी तरह से खून से लथपथ था किंतु मेरे पति यही नहीं रुके, उन्होंने बेल्ट निकालकर मुझे पीटना शुरू कर दिया।

मैं बहुत चिल्लाई,  “मां जी मुझे बचा लो” पर मेरी आवाज सुनकर कोई नहीं आया। मुझे मारते हुए मेरे पतिदेव बोले कि “तुम 8:00 बजे तक सोती रही और मेरी मां ने सभी मेहमानों के लिए खाना बनाया”, “तुम्हें क्या हम रानी बनाने के लिए लेकर आए हैं”। 

रोज होती है पिटाई

उनकी यह बातें सुनकर, मैं सचमुच हैरान थी कि मां जी ने मुझे खुद ही काम करने से मना किया था। तभी मैं समझी कि आज इतने दिनों बाद मेरी सासू मां को मुझ पर रहम क्यों आया।

खुद को संभालते हुए जैसे ही मैं कमरे से बाहर निकली, मेरी सासू माँ मुझे देख कर हंस रही थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि सास क्या ऐसी भी होती है जो सिर्फ अपना रौब दिखाने के लिए बहू पर जुलम करे।

इस घटना के थोड़े दिन बाद ही मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं और मेरे सामने एक उम्मीद जगी कि शायद अब सब कुछ सही हो जाएगा। परंतु आज मेरी बच्ची 4 साल की हो गई है लेकिन कोई ऐसा दिन नहीं गया, जिस दिन सास ने पति से मेरी पिटाई न करवाई हो।

पुराने घाव भर जाते हैं और नए हर दिन ताजा मिलते रहते हैं। हालांकि मुझ में जीने की कोई इच्छा बाकी नहीं है फिर भी अपनी बेटी के लिए जिंदा हूं। 

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