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भूत प्रेत अमावस्या को ही क्यों निकलते है?

भूत प्रेत अमावस्या को ही क्यों निकलते है? इसके बारे में आज हम जानने वाले है।

अमवस्या हर महीने में एक बार आता है। अमावस्या का अपने आप में एक अलग महत्व होता है।

जिस तरह धरती और आकाश के मिलन का स्थान क्षितिज कहलाता है, ठीक वैसे ही सूर्य और

चंद्रमा के मिलन के दिन को अमावस्या कहते हैं। और ज्यादातर लोग बोलते है, की “आज अमावस्या

है। रात को बाहर मत निकालना ” पता है, ऐसा क्यों है?

अमावस्या को बुरी शक्तियों का दिन भी कहा जाता है। इस दिन आकाश में चंद्रमा नहीं दिखाई देता है

बल्कि घोर अंधेरा दिखाई देता है। एक साल में कुल बारह बार अमा-वस्या आता है।

दोस्तों आज हम अपने ब्लॉग में भूत, प्रेत और अमावस्या के विषय में बात करेंगे।

अमावस्या को बुरी शक्तियों का दिन भी कहा जाता है। इस दिन आकाश में चंद्रमा नहीं दिखाई देता है

बल्कि घोर अंधेरा दिखाई देता है। एक साल में कुल बारह बार अमावस्या आता है।

दोस्तों आज हम अपने ब्लॉग में भूत, प्रेत और अमावस्या के विषय में बात करेंगे।

भूत और प्रेत कौन है?

हिंदू धर्म में कहां जाता है मरने के बाद वही व्यक्ति भूत और प्रेत बनता है जो अकाल मृत्यु मरता है।

कहने का तात्पर्य है यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु समय से पहले किसी दुर्घटना के कारण हो जाता है,

तो ऐसे व्यक्तियों की आत्मा ही भूत एवं प्रेत का रूप धारण करती है।

जब कोई साधारण व्यक्ति मरता है यदि मरने से पहले उस व्यक्ति की कोई अधूरी इच्छा रह जाती है,

तो वह भूत बन जाता है और इधर-उधर भटकता रहता है। ज्यादातर भूत पुरूष जाति के लोग ही होते हैं।

इसके अतिरिक्त कहा जाता है कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार मरने के बाद योनि दी जाती है।

कोई भूत योनि में जाता है, कोई पिशाचिनी में जाता है, कोई प्रेत योनि में जाता है तो कोई  चुड़ैल योनि में जाता है।

भूत और प्रेत का अमावस्या से क्या संबंध होता है?

जिस तरह मनुष्य अच्छे व बुरे होते हैं। ठीक वैसे ही भूतों प्रेतों में भी कोई अच्छे एवं बुरे होते है।

कहा जाता है कि अमावस्या की रात को बुरी शक्तियों को ताकत मिलती है।

अमावस्या के दिन बुरी शक्तियां उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है जो लोग तामसिक आहार ग्रहण करते हैं।

अमावस्या के दिन कोई पवित्र कार्य करने की सलाह नहीं दी जाती है।

ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि चंद्रमा मन का देवता होता है और चंद्रमा अमावस्या के दिन मुख्य

रूप से आकाश में दिखाई नहीं देता है। इन्हीं कारणों से भूत प्रेतों की शक्तियां बढ़ जाती है।

अमावस्या के दिन बुरी शक्तियों की शक्ति दुगनी हो जाती है और यह शक्ति इतनी प्रभावशाली होती है

कि किसी भी पवित्र आत्मा को अपनी और आकर्षित कर देती है।

कहा जाता है कि यही बुरी शक्तियां कई बार लोगों को आत्महत्या करने पर भी मजबूर कर देती है।

भूत प्रेत से बचने के लिए अमावस्या के दिन क्या उपाय करना चाहिए?

सभी प्रकार के तामसिक आहार को खाने से बचना चाहिए।

तामसिक आहार जैसे- मांस, मछली,शराब इत्यादि।

अमावस्या के दिन कोशिश कीजिए अपने बाल और नाखून बिल्कुल भी ना काटे।

बाल और नाखून शरीर के प्रमुख अंग होते हैं और बुरी शक्तियां आपके बाल और खून से

आप पर जादू टोना भी कर सकते है। अमावस्या के दिन कोशिश करें बाहर का भोजन ना खाने का।

सात्विक आहार लिजिए वह भी अपने घर का बना हुआ।

भूत प्रेत अमावस्या को ही क्यों निकलते है?

दोस्तों आज हमने जाना भूत प्रेत और अमावस्या के विषय में। यदि आप अमावस्या के दिन डरते हैं,

तो कोशिश कीजिए रोजाना स्नान करने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करने का।

कहा जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ जो व्यक्ति करते हैं उन्हें कभी भी भूत, प्रेत एवं पिशाच

तीनों ही कभी भी हनुमान चालीसा पढ़ने वाले व्यक्ति को डराते नहीं है और ना ही उन्हें कभी परेशान करते

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