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विवाहित महिला को पति के सामने कितना झुकना पड़ता है ?

शादी अपने आप में एक बहुत बड़ा कमिटमेंट होता है। जो 2 लोग एक दूसरे को शादी के मंडप में कमिटमेंट करते हुए फेरे लेते हैं। शादी का मतलब होता है गठबंधन। गठबंधन अर्थात दो व्यक्तियों का साथ में बंधन। व्यक्ति भले ही 2 होते हैं, लेकिन वह दिल,बुद्धि आत्मा एवं शरीर से एक होते हैं। विवाहित महिला को पति के सामने कितना झुकना पड़ता है ?

हम शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट क्यों भूल रहे हैं?

शादी के दौरान सात फेरे लिए जाते हैं और सात वचन भी लिए जाते हैं। इतना ही नहीं दोनों पति-पत्नी एक दूसरे को वचन देते वक्त, यह भी वचन लेते हैं कि वह दोनों एक दूसरे का साथ आजीवन निभाएंगे। लेकिन आज के वर्तमान समय में शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट ही लोग भूलते चले जा रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है आइए विस्तारपूर्वक चर्चा करते हैं-

एडजस्टमेंट की कमी

शादी के बाद आजकल जो सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। वह है एडजेस्टमेंट की। लोग शादी तो कर लेते हैं। लेकिन शादी के बाद लड़का और लड़की दोनों को ही एडजस्टमेंट करना होता है। यह बात किसी को भी ध्यान में नहीं रहता है। एक अगर एडजस्ट करता है, तो दूसरा बिल्कुल भी एडजस्ट करने को तैयार नहीं होता है। शादी फॉरएवर का कांसेप्ट इस कारण से भी लोग भूल जा रहे हैं।

ईगो बीच में चला आता

शादी के बाद पति पत्नी के बीच में जहां प्यार होना चाहिए। वहीं पर प्यार ना होकर ईगो बीच में चला आ रहा है। गलती सबसे होती है और सभी को अपनी गलती माननी भी चाहिए। यदि कोई गलती करके उस गलती को नहीं मानता है और अपने ईगो के कारण झुकता भी नहीं है। तब ऑटोमेटिकली सामने वाले को गुस्सा आ ही जाता है। शादी फॉरएवर का मतलब होता है।  शादी के बाद अपनी हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाना। गलती हो तो उसे स्वीकार करना और बेवजह झगड़ा करने से बचना।

लेकिन यह बात उन लोगों को कौन समझाएगा कि शादी के बाद पति पत्नी के बीच में प्यार के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होना चाहिए। इगो को तो अपने शादीशुदा जीवन में जगह ही नहीं देना चाहिए। 

सीरियसनेस का अभाव

कोई भी रिश्ता मजबूत तब बनता है। जब उस रिश्ते में गंभीरता का भाव होता है। यदि रिश्ता मजाक स्वरूप लिया जाता है। तो फिर उस रिश्ते का कोई अर्थ नहीं रह जाता है और शादी तो एक बहुत बड़ा कमिटमेंट होता है। जिसमें पति-पत्नी में गंभीरता का होना बहुत जरूरी है। यदि गंभीरता शादीशुदा जिंदगी में ना हो, तब वह रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है। फिर एक दिन कमजोर होते -होते रिश्ता टूट जाता है।

निष्कर्ष 

शादीशुदा जीवन में जितना हो सके झुकना जरूरी होता है। जितना हो सके अपने रिश्ते को मजबूत करना होता है। जहां जरूरत हो वहां पर एक दूसरे का साथ देना भी जरूरी होता है। लेकिन जिन रिश्तो में यह सब कुछ भी नहीं होता है। वह रिश्ता धीरे-धीरे खोखला पड़ जाता है और फिर आगे चलकर उस रिश्ते का कोई भविष्य भी नहीं रह जाता है। इसलिए आज के समय में शादी फॉरएवर का कांसेप्ट लोग भूलते चले जा रहे हैं ।यदि कोई कॉन्सेप्ट्स लोगों को याद रह रहा है। तो वह है शादी के बाद तलाक का कांसेप्ट जिसे बदलना बहुत जरूरी है।

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