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नवरात्रि प्रथम दिन – घट स्थापना एवं माता शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि प्रथम दिन – घट स्थापना एवं माता शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि आने ही वाला है दोस्तों। इसलिए आज हम नवरात्रि के प्रथम दिन के विषय में अपने ब्लॉग में

चर्चा करने वाले हैं।नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है।

बहुत सारे घरों में,नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना होती है। यह घट 9 दिनों तक घर में रहता है।

आइए विस्तार से जानते हैं-

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माता शैलपुत्री कौन है

माता शैलपुत्री को मां भवानी, पार्वती और हेमावती के नाम से भी जाना जाता है।

वह सांसारिक सार के रूप में जानी जाती है।माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रमुख और पूर्ण रूप है।

चूंकि वह भगवान शिव की पत्नी थी इसलिए उन्हें पार्वती के नाम से जाना जाता है। 

उन्होंने भगवान हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। जिसके कारण उनका नाम शैलपुत्री

पड़ा जिसका अर्थ है पहाड़ों की पुत्री। उनके माथे पर अर्धचंद्र है और उनके दाहिने हाथ में

त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है।

 देवी शैलपुत्री का वाहन बैल है।

माता को लाल रंग बेहद प्रिय है। मां शैलपुत्री को गुड़हल के फूल अर्पित करना पवित्र माना जाता है 

माता शैलपुत्री की पूजा विधि

दुर्गा पूजा या नवरात्रि महिला शक्ति का प्रतीक है। इसलिए इस पूजा का शुभारंभ घटस्थापना द्वारा किया जाता है।

घटस्थापना नवरात्रि के सभी महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है।

प्रथम दिन की पूजा उचित दिशा-निर्देशों और पूजा मुहूर्त के अनुसार ही करनी चाहिए।

घटस्थापना पूजा की सामग्री का उपयोग करके की जाती है जिन्हें पवित्र और प्रतीकात्मक माना जाता है। 

घट मिट्टी से बने पैन जैसे दिखने वाला बर्तन जैसा होता है। 

घट को स्थापित करने से पहले पूजा घर को अच्छे से साफ किया जाता है।

फिर एक मिट्टी की परत के ऊपर धान का बीज फेंका जाता है।और उसके ऊपर घट को रखा जाता है।

कहां जाता है यदि यह धान का बीज 9 दिन के बाद घास का रूप ले लेता है तो इसका मतलब यह है कि,

आपको मां दुर्गा की ओर से धन-धान्य का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। इस दिन व्रत रखा जाता है

मां शैलपुत्री के चरणों में शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि,इस भोग को चढ़ाने

से भक्तों को रोग मुक्त जीवन की प्राप्ति होती है। दोस्तों जब हम देवी शैलपुत्री के बारे में सोचते हैं,

तो हमारे दिमाग में क्या आता है?

एक ऐसी देवी जो हवा की तरह स्वतंत्र है,पानी के रूप में अनुकूल है,आग के रूप में भयंकर है,

पृथ्वी के रूप में करुणामय और पोषण है, और अंतरिक्ष के रूप में शांत है।

पूजा और मंत्र

मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए,उनकी मूर्ति को चमेली के फूलों से सजाया जाता है।

और निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है ताकि माता प्रसन्न हो जाए।

“ऊं देवी शैलपुत्रयै नमः”

पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण 21 बार करने से माता बेहद प्रसन्न होंगी।

यदि आप 21 बार से अधिक मंत्र पढ़ना चाहते तो आप पढ़ सकते हैं।

अब मंत्र को 5 बार, 11 बार, 21 बार, 51 बार, 108 बार पढ़ सकते है।

ध्यान रहे उच्चारण शुद्ध होना चाहिए एवं स्पष्ट भी।

निष्कर्ष

ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा को देवी शैलपुत्री द्वारा शासित किया जाता है।

चंद्रमा को भाग्य का स्वामी माना जाता है,इसलिए इस दिन देवी की पूजा करने से भाग्य,

स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।

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