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क्यों गणेश जी और शिव जी के भोग में तुलसी डालने से मना किया जाता है?

क्यों गणेश जी और शिव जी के भोग में तुलसी डालने से मना किया जाता है?

ईश्वर को भोग लगाते समय तुलसी पत्ता भी डाला जाता है,क्योंकि बहुत से ईश्वर ऐसे हैं जिन्हें अपने भोग में

तुलसी पत्ता बहुत पसंद होता है। भगवान विष्णु,राम और कृष्ण भगवान को तुलसी पत्ता बहुत ही प्रिय है।

इसलिए इन तीनों में तुलसी पत्ता डालना अनिवार्य होता है।

वही अगर बात की जाए गणेश जी की तो उनके भोग में तुलसी पत्ता वर्जित किया जाता है।हाल ही में

गणेश चतुर्थी बीता है। हर घर में गणेश जी की पूजा धूमधाम से हुई है।लेकिन किसी भी घर में गणेश

जी को तुलसी पत्ता उनके भोग में नहीं दिया गया है।

आज हम अपने ब्लॉग से बताएंगे कि क्यों गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं किया जाता है। बहुत समय पहले

की बात है पुराणों में भगवान गणेश को तुलसी ना अर्पित करने का कारण बताया गया है।

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ये है असली कहानी

एक बार गणेश जी गंगा किनारे ध्यान कर रहे थे।और तुलसी वर की तलाश में इधर उधर जा रही थी।

तभी उनकी नजर गंगा किनारे ध्यान करते हुए गणेश जी पर पड़ी। वह उनसे बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने

गणेश जी के ध्यान को भंग कर उनसे शादी करने का प्रस्ताव रखा।

तुलसी के इस व्यवहार के कारण गणेश जी बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने उनसे शादी करने से साफ

इंकार कर दिया। बस इसी बात पर तुलसी नाराज होकर गणेश जी को अभिशाप देती है कि तुम्हारी एक

नहीं दो-दो शादी होगी। फिर गणेश जी ने भी तुलसी को अभिशाप दिया कि,तुम्हारी शादी एक राक्षस से

होगी गणेश जी के अभिशाप को सुनकर तुलसी घबरा गई और उसने गणेश जी से हाथ जोड़कर

माफी मांग लिया।

गणेश जी ने तुलसी को माफ तो कर दिया।साथ ही गणेश जी ने कहा था कि,तुम कलयुग में बहुत प्रसिद्ध

होगी एवं भगवान विष्णु, राम एवं कृष्ण के भोग में सदैव डाली जाओगी। लेकिन मेरे किसी भी भोग में 

तुम्हें डालने की अनुमति अब नहीं होगी। अगर कोई मेरी भोग में तुम्हें डालेगा तो वह भोग अशुभ माना जाएगा।

यही कारण है कि तुलसी का पत्ता गणेश जी के भोग में डालने से वह बहुत नाराज हो जाते हैं।

शिवजी के भोग के लिये क्यों तुलसी नहीं डाली जाती?

भगवान गणेश की तरह है भगवान शिव जी के भोग में  भी तुलसी के पत्ते को नहीं डाला जाता है।

लेकिन भगवान शिव के भोग में तुलसी पत्ता अर्पित ना करने का कारण है।वह कारण यह है कि

तुलसी जी शापित थी। तुलसी के पिछले जन्म का नाम वृंदा था। और वृंदा को अभिशाप दिया गया था।

इसलिए शापित तुलसी को शिव जी के भोग में शामिल नहीं किया जाता है। इसके अतिरिक्त तुलसी

को भगवान श्री हरि के पटरानी के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए शिव जी के भोग में तुलसी

पत्ता को नहीं डाला जाता।

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भोगके साथ बेलपत्र अर्पित किया जाता है।

दोस्तों हमने एक छोटा सा प्रयास किया है आपको यह जानकारी देने का कि क्यों भगवान शिव

गणेश जी के भोगमें तुलसी पत्ता नहीं डाला जाता है।आप में से बहुत सारे लोग हो सकता है कि

भगवान गणेश और शिव को तुलसी पत्ता अर्पित करते हैं। लेकिन इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद बहुत

सारे लोग अब भगवान गणेश शिव जी को तुलसी पत्ता नहीं डालेंगे।

इसलिए हमने आपसे यह जानकारी शेयर किया है।

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