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एक शादीशुदा महिला ही आपको बता सकती है वैवाहिक जिंदगी की असलियत

शादीशुदा महिलाओं की वह परेशानियां, जो आसानी से जाहिर नहीं होती

पुरुषों और महिलाओं के सोचने और जीवन को देखने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। लेकिन यह सब लोगों की वैवाहिक स्थिति के साथ बदल जता है। कारण एक महिला की शादी से पहले की ज़िंदगी और बाद की ज़िंदगी अलग होती है। शादी के बाद उसे बहुत कुछ बदलना पड़ता है और पूरी तरह से नया व्यक्ति बनना पड़ता है।

शादी की बात सुनकर जितनी खुशी होती है। उतना ही दुख शादी के बाद होता है। कारण शादी से पहले और शादी के बाद की जिंदगी पूरी तरह से अलग होती है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं। जिनका अनुभव बिना शादी के नहीं किया जा सकता। एक शादीशुदा महिला ही आपको बता सकती है वैवाहिक जिंदगी की असलियत

लड़के एवं लड़कियों के लिए प्यार का मतलब थोड़ा अलग होता है

शादी से पहले लड़के लड़कियों पर ज्यादा शक करते हैं। लेकिन शादी के बाद यह चीजें बदल जाती है और लड़कियां लड़कों पर शक करने लगती हैं। इसके लिए जिम्मेदार खुद पुरुष होते हैं क्योंकि शादी से पहले जिस तरह से वह अपनी गर्लफ्रेंड का ख्याल रखते हैं। उनके बारे में चिंता करते हैं। शादी के बाद तो यह सब करना वह बिल्कुल ही बंद कर देते हैं। इस वजह से स्त्रियों को अपने पति पर शक होता है और यह शक धीरे-धीरे बढ़ता ही चला जाता है।

लड़कों के लिए प्यार जैसा होता है। लड़कियों के लिए प्यार एक एहसास है। शादी के कुछ साल बाद कई पति अपनी पत्नियों में रुचि खो देते हैं। कभी प्यार की कमी होती है तो कभी बस व्यस्तता या दिनचर्या। वहीं दूसरी ओर जैसे-जैसे शादी की उम्र बढ़ती है, पत्नी की ध्यान आकर्षित करने की इच्छा बढ़ती जाती है। किसी भी विवाहित महिला को अपने जीवन में कभी ना कभी अपने पति की लापरवाही से जलना ही पड़ता है।

सांस को लेकर हर बहुत परेशान रहती हैं

समाज में विवाहित महिलाओं के जीवन में सांस एक बहुत बड़ा मुद्दा बन जाती है। ज्यादातर मामलों में, विवाहित महिलाएं सांस के कारण विभिन्न मानसिक और पारिवारिक समस्याओं से पीड़ित होती हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि या तो बहू सांस को अपना नहीं मानती या फिर सास बहू को अपना नहीं मानती है।

शादी के बाद जब एक लड़की अपना सब कुछ छोड़कर ससुराल जाती हैं। तो उसे ससुराल में सब के द्वारा अपनाना चाहिए। लेकिन कहीं ना कहीं यह ना अपनाने वाली परंपरा बहू के मन को दुःखी कर देता है। 

पति का पराई स्त्री को देखना

दुनिया में ऐसा कोई पुरुष नहीं है। जिसने दूसरी महिलाओं को कभी नहीं देखा या ना देखा हो। शादी के बाद कभी-कभी पत्नियों को तीसरी महिला के आने का दुःख भी झेलना पड़ता है। हो सकता है कि पति किसी दूसरी औरत में दिलचस्पी रखता हो, और हो सकता है कि कोई दूसरी औरत उनके पति में दिलचस्पी ले रही हो। दोनों ही मामलों में पत्नी को ही सजा भुगतना पड़ता है।

पत्नियों पर संसार का भार ज्यादा पड़ता है

समाज में, पुरुष अपनी पत्नियों की वैवाहिक जिम्मेदारियों को साझा नहीं करते हैं। एक महिला का जीवन शादी के बाद पुरुष के जीवन में होने वाले बदलाव से कहीं ज्यादा बदल जाता है। एक महिला उस उम्र में अकेलेपन और अवसाद से पीड़ित होने लगती है जब उसे परिवार की सभी जिम्मेदारियों को अकेले ही निभाना पड़ता है। खासकर बच्चों के थोड़े बड़े होने के बाद।

शादी के बाद लड़कियों को मायके की याद ज्यादा आती है

शादी के बाद ही लड़कियों को यह एहसास होता है कि माता-पिता और परिवार को छोड़ना और पूरी तरह से नए परिवार को अपनाना कितना मुश्किल होता है। इसलिए शादी के बाद परिवार के लिए तनाव इतना बढ़ जाता है। एक शादीशुदा महिला ही आपको बता सकती है वैवाहिक जिंदगी की असलियत

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