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विवाह में भाग्य की कितनी भूमिका होती है?

कहा जाता है कि विवाह, मृत्यु एवं जन्म ईश्वर के मर्जी के बगैर नहीं हो सकता। जब सही समय आता है। तब विवाह होता है। भाग्य का विवाह के मामले में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होता है। कहां गया है शादी का योग है तो ही शादी में स्वास ले पाएंगे। रहेगा चाहे आपकी मर्जी हो या आपके मर्जी के खिलाफ हूं मैं।

विवाह में भाग्य की कितनी भूमिका होती है?

शादी के मामले में अक्सर दोनों पति पत्नी की कुंडली को मिलाया जाता है। यदि कुंडली में कोई भी दोष दिखें। तो तुरंत अच्छे दोस्ते से निभाते हैं।

भाग्य की भूमिका कैसी होती है आइए जानते हैं—–

यदि आपकी किस्मत में शादी लिखा हुआ है। तो आप दुनिया के किसी भी कोने में रहे आपकी शादी उसी समय उसी जगह पर होगी, जिस समय आपको होना चाहिए था।

भाग्य रेखा अहम भूमिका निभाते हैं, शादी के मामले में कैसे?

शादी के मामले में नहीं बताया जा सकता कि व्यक्ति की शादी कब होगी और कहां होगी। लेकिन वास्तव में भाग्य रेखा बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।जब बात शादी की आती है।

प्यार

इसके मूल में, प्रेम किसी अन्य व्यक्ति के प्रति प्रतिबद्ध होने का निर्णय है। यह एक क्षणभंगुर भावना से कहीं अधिक है जैसा कि टेलीविजन, बड़े पर्दे और रोमांस उपन्यासों पर चित्रित किया गया है। भावनाएं आती हैं और जाती हैं, लेकिन प्रतिबद्ध होने का एक सच्चा निर्णय हमेशा के लिए रहता है – और यही स्वस्थ विवाह को परिभाषित करता है।

विवाह में उतार-चढ़ाव- अच्छे और बुरे के माध्यम से किया जाने वाला निर्णय ले रहा है। जब चीजें अच्छी चल रही हों, तो प्रतिबद्धता आसान होती है। लेकिन सच्चा प्यार जीवन के परीक्षणों के माध्यम से भी प्रतिबद्ध रहने से प्रदर्शित होता है।

विनम्रता

हम सभी में कमजोरियां होती हैं और रिश्ते हमेशा इन दोषों को पृथ्वी पर किसी भी चीज़ की तुलना में जल्दी प्रकट करते हैं। एक स्वस्थ विवाह का एक अनिवार्य निर्माण खंड यह स्वीकार करने की क्षमता है कि आप पूर्ण नहीं हैं, कि आप गलतियाँ करेंगे, और आपको क्षमा की आवश्यकता होगी। अपने साथी पर श्रेष्ठता का रवैया रखने से नाराजगी पैदा होगी और यह आपके रिश्ते को आगे बढ़ने से रोकेगा। शादी को जितनी बार आवश्यक हो दोहराएं। 

विवाह संबंध भाग्य तय करता है

कई बार लोग किसी से प्यार कर लेते हैं और सोचते है कि उसी के साथ ही उनका विवाह संपन्न होगा। लेकिन मार्ग में इतनी बाधा आती है कि विवाह होते होते भी नहीं होता। फिर किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह हो जाता है। जिसे व्यक्ति जानता तक नहीं, पहचानता तक नहीं है। यह सब कुछ भाग्य के कारण ही तो होता है।

विवाह को सफल बनाने में भी भाग्य ही जिम्मेदार होता है

ऐसा नहीं है कि शादी तक ही भाग्य साथ निभाता है। शादी को सफल बनाने में भी भाग्य बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारी जिंदगी में जो भी काम होता है। हम जो भी करते हैं। उन सभी चीजों के लिए हमारा भाग्य ही जिम्मेदार होता है। हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएंगे।

भाग्य ही हमें हमारे मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है

हम चाहे कितना भी अपनी जिंदगी में सपना देख लें। किसी के साथ जिंदगी बिताने का। लेकिन वह सपना तब तक साकार नहीं होता। भाग्य हमारे हर कर्म में, हर कार्य के पीछे नजर रखता है।

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